Friday, 24 November 2017

लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान

लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान

लोहिया स्‍वच्‍छ बिहार अभियान (LSBA) के तहत राज्‍य के ग्रामीण क्षेत्रों खुले में शौच मुक्‍त बनाने का लक्ष्‍य है जिसे केन्‍द्र प्रायोजित स्‍वच्‍छ भारत मिशन (ग्रामीण) (SBM-G) तथा राज्‍य सम्‍पोषित लोहिया स्‍वच्‍छता योजना के प्रावधानों से पूरा किया जाना है। इस अभियान के तहत १.६६ करोड़ परिवारों को शौचालय उपलब्ध करवाना तथा बिहार को 02 अक्‍टूबर, 2019 तक खुले में शौच मुक्‍त बनाने का लक्ष्‍य है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) अंतर्गत गंगा कार्य योजना (नमामि गंगे) के तहत राज्य के 12 जिलों यथा; बेगुसराय, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, कटिहार, खगरिया, लखीसराय, मुंगेर, पटना, समस्तीपुर, सारण, तथा, वैशाली जिलों में गंगा किनारे अवस्थित 61 प्रखंडो के 307 पंचायतो में शौच मुक्त बनाये जाने का लक्ष्य है ।
लोहिया स्‍वच्‍छ बिहार अभियान (LSBA) का उद्देश्‍य :-
क) "खुले में शौच मुक्‍त बिहार" के लक्ष्‍य की प्राप्ति के लिए समयबद्ध तरीके से ग्रामीण क्षेत्रों में स्‍वच्‍छता का आच्‍छादन।
ख) स्‍वच्‍छता अभियान की गतिविधियों से विभिन्‍न भागीदारों यथा पंचायती राज संस्‍थान के प्रतिनिधियों, संकुल स्‍तरीय संघों, ग्राम संगठनों, स्‍वयं सहायता समूहों, नि:शक्‍त स्‍वयं सहायता समूह विभिन्‍न सरकारी विभागों एवं गैर सरकारी संगठनों को सम्मिलित करना।
ग) सामूहिक व्‍यवहार परिवर्तन तथा स्‍वच्‍छता विषयक सुरक्षित आचार सुनिश्चित करने के लिए समुदाय आधारित सम्‍पूर्ण स्‍वच्‍छता (CLTS) की रणनीति को अपनाना जो सारे समुदाय को स्‍वच्‍छता के प्रति जागरूक करे।
घ) समुदाय आधारित सम्‍पूर्ण स्‍वच्‍छता सुनिश्चित करने हेतु ठोस एवं तरल अवशिष्‍ट के प्रबंधन (SLWM) का क्रियान्‍वयन।



लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (LSBA) क्रियान्वयन हेतु संरचना

a) राज्य स्तरीय संरचना :- 
राज्य स्तरीय संरचना के शीर्ष पर प्रधान सचिव / सचिव ग्रामीण विकास विभाग होंगे । LSBA के कार्यान्वयन हेतु राज्य स्तर पर राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई (SPMU-LSBA) कार्यरत रहेगा जिसमें मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जीविका मिशन निदेशक होंगे तथा उनके तकनीकी सहयोग हेतु राज्य समन्वयक एवं राज्य परियोजना प्रबंधक - स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं पोषण (SPM-SHN) एवं अन्य विषय विशेषज्ञ होंगे ।
b) जिला स्तरीय संरचना :- 
जिला स्तर पर LSBA के कार्यान्वयन हेतु जिला जल एवं स्वच्छता समिति (DWSC) कार्यरत है । इस समिति के पदेन अध्यक्ष जिला पदाधिकारी है एवं उपाध्य्क्ष उप विकास आयुक्त हैं । निदेशक - लेखा, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) इस समिति के सदस्य सचिव होंगे । कार्यपालक अभियंता, लोक-स्वास्थ्य प्रमण्डल, जिला जल स्वच्छता समिति (DWSC) के सदस्य रहेंगे । जिला परियोजना प्रबंधक (DPM)- जीविका भी इस समिति के सदस्य होंगे तथा शेष सदस्य पूर्व की भांति पदेन सदस्य रहेंगे । DWSC के सहयोग हेतु जिला स्तर पर जिला समन्वयक, सहायक समन्वयक (तकनीकी ) तथा अन्य कुछ तकनीकी परामर्शी (आई.ई.सी., मानव संसाधन विभाग, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन, स्वच्छता तकनीकी विशेषज्ञ, ठोस, तरल अवशिष्ट प्रबंधन, डाटा इंट्री ऑपरेटर इत्यादि ) होंगें जिनकी नियुक्ति हेतु अग्रेतर कारवाई की जा रही है । 
लोहिया स्वच्छ बिहार योजना जिला स्तर पर जिला पदाधिकारी के नेतृत्व में किया जाना है । जिला पदाधिकारी द्वारा स्वच्छता मिशन क्रियान्वयन के संबंध में दिए गए निर्देश का उप विकास आयुक्त अनिवार्य रूप से अनुपालन करेंगें एवं जिला जल स्वच्छता समिति के कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे । 
c) प्रखंड स्तरीय संरचना : 
लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (LSBA) के कार्यान्वयन हेतु राज्य के प्रत्येक प्रखण्ड में प्रखण्ड स्तरीय अनुश्रवण इकाई (BPMU) का गठन किया जाना है । इस इकाई में प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, पदेन अध्यक्ष होंगे, प्रखण्ड समन्वयक सदस्य सचिव होंगें तथा अंचलाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, प्रखण्ड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखण्ड परियोजना प्रबंधक (जीविका) सदस्य की भूमिका निभायेंगे । केंद्र प्रबंधक - बुनियाद केन्द्र, प्रखण्ड कृषि पदाधिकारी भी इसके सदस्य हो सकते है जो LSBA के क्रियान्वयन, अनुश्रवण एवं समन्वयन में सहयोग करेंगे । 
प्रखण्ड विकास पदाधिकारी प्रखण्ड स्वच्छता पदाधिकारी के रूप में कार्य करेंगे । BPMU के तकनीकी सहयोग हेतु प्रखण्ड समन्वयक, डाटा इंट्री ऑपरेटर होंगे तथा आवश्य्कतानुसार संकुल समन्वयक (Cluster Coordinator) होंगे जिनकी बहाली हेतु अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है । 
d) ग्राम पंचायत स्तरीय संरचना :- 
पंचायत स्तर पर लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (LSBA) के क्रियान्वयन हेतु ग्राम पंचायत के मुखिया अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे एवं वार्ड सदस्य, संकुल संघ/ ग्राम संगठन (जीविका) के प्रतिनिधि, पंचायत रोजगार सेवक, इंदिरा आवास सहायक, किसान सलाहकार इत्यादि सदस्य रहेंगे । 
उपर्युक्त के अतिरिक्त वार्ड स्तर पर समिति होगी जिसके अध्यक्ष वार्ड सदस्य होंगे तथा समिति में संकुल संघ / ग्राम संगठन (जीविका )के प्रतिनिधि, आंगनवाड़ी सेविका/सहायिका, आशा कार्यकर्ता, ANM, विकास मित्र, टोला सेवक, स्कूली बच्चे, शिक्षकगण, जागरूक दिव्यांग व्यक्ति (Disabled person) भी होंगे ।

सामुदायिक स्वच्छता अकादमी(Community Wash Academy - CWA)

सामुदायिक स्वच्छता अकादमी का मुख्य उद्येश्य "खुले में शौच से मुक्त" समुदाय की स्थिति को प्राप्त करने के लिए वर्तमान में कार्यरत सभी सामुदायिक संस्थानों के सहयोग एवं समन्वय से सामुदायिक उत्प्रेरण (Community Mobilization) किया जाना है । CWA स्थानीय स्तर पर सामुदायिक पेशेवर (Community Professionals) का स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा ठोस एवं सरल अवशिस्ट के प्रन्वंधन के लिए प्रशिक्षण एवं उनमुखीकरण कराना । 
सामुदायिक स्वच्छता अकादमी(CWA) के मुख्य कार्य निम्नलिखित होंगे :- 
a) स्वच्छता एवं उससे सम्बंधित सभी प्रकार के प्रशिक्षण एवं जानकारी उपलब्ध कराना । 
b) Digital Library बनाना जिसमे स्वच्छता तथा ठोस एवं सरल अवशिस्ट प्रबंधन (SLWM) सम्बंधित फिल्मो / विडियो का संग्रहण एवं प्रसारित करना । 
c) समुदाय के चिन्हित व्यक्तियों को विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण देकर जिला में Resource Pool तैयार करना तथा आवश्यकतानुसार उनकी सेवाएँ स्वच्छता कार्यकर्मो में लिया जाना । 
d) वर्तमान में Pilot के तौर पर CWA की स्थापना बिहार के चार जिलो यथा - मुज्ज़फरपुर,गया,जहानाबाद एवं सहरसा में करने हेतु अग्रेतर करवाई की जा रही है ।

Solid and Liquid Waste Management

The objective of SBM(G) is to bring about improvement in the cleanliness, hygiene and the general quality of life in rural areas. Solid and Liquid Waste Management (SLWM) is one of the key components of the programme. To create clean villages, it is essential that the IEC interventions focus on Solid and Liquid Waste Management so as to create a felt need for these activities amongst the population. This must lead to the setting up of systems for the scientific disposal of waste in such a way that has a tangible impact on the population. The Community /Gram panchayat has to be motivated to come forward and demand for such a system, which they have to subsequently operate and maintain. 

Once the demand is created, to ensure that the resources are used efficiently, SLWM is to be taken up in project mode for each Gram Panchayat (GP) with financial assistance capped for a GP on number of household basis to enable all GPs to implement sustainable SLWM projects. The total assistance under SBM(G) for SLWM projects shall be worked out on the basis of total number of households in each GP, subject to a maximum of Rs.7 lakh for a GP having up to 150 households, Rs.12 lakh up to 300 households, Rs.15 lakh up to 500 households and Rs.20 lakh for GPs having more than 500 households. Funding for SLWM project under SBM(G) is provided by the Central and State Government in the ratio of 75:25. Any additional cost requirement is to be met with funds from the State/GP, and from other sources like Finance Commission funding, CSR, Swachh Bharat Khosh and through the PPP model. 

Under Solid and Liquid Waste Management, the following activities inter-alia may be undertaken: 

i. For Solid Waste Management: States are to decide the technologies suitable to their areas. Technologies identified by the Committee on Technologies may also be considered for implementation. Collection, segregation and safe disposal of household garbage, decentralised systems like household composting and biogas plants shall be permitted. Activities related to maximum reuse of organic solid wastes as manure should be adopted. Such technologies may include vermi-composting, NADEP composting, or any other composting method, individual and community biogas plants. Funds allocated for Solid and Liquid Waste Management may be used to implement safe disposal solutions for menstrual waste (used sanitary cloths and pads) and setting up incinerators in Schools, Women’s Community Sanitary Complexes, Primary Health Centre, or in any other suitable place in village and collection mechanisms etc can be taken up. Technologies may include appropriate options that are socially acceptable and environmentally safe. 

ii. For Liquid Waste Management: States are to identify suitable technologies. Methods adopted for management of liquid wastes may focus on maximum reuse of such waste for agriculture purposes with least operation and maintenance costs. For collection of waste water, low cost drainage/ small bore system, soakage pit may be adopted.

For treatment of waste water the following technologies may inter-alia be considered:

a. Waste Stabilization Pond (WSP) technology- Waste stabilization ponds (WSPs)

b. Duckweed based waste water treatment.

c. Phyto roid Technology (developed by NEERI)

d. Anaerobic decentralized waste water treatment.

For details of the technologies suitable for rural areas, a handbook “Technical options for Solid and Liquid Waste Management in Rural areas” and other publications under preparation to be issued by the Ministry of Drinking Water and Sanitation may be referred. These publications can be accessed on the website under the head “Publication” or on URL http:// www.mdws.gov.in/ 

All GPs are to be targeted for coverage with a SLWM project. SLWM Projects for each GP should be part of the annual District Plan. The Annual District Plan should be approved by State level Scheme Sanctioning Committee (SLSSC). Each individual SLWM project may be approved at the DWSC level as per the technical and financial rules of the individual states. The objective is to initiate SLWM projects in all GPs without delay. 5.10.5 Every State should have at least one SLWM Consultant at the State level and one SLWM Consultant in each District DWSM/DWSC to guide the preparations of the SLWM projects for each GP. Assistance of Professional agencies/NGOs may be sought to prepare/develop /test/ implement such projects. The Project preparation, supervision and monitoring costs of SLWM projects payable to such Agencies may be made a part of the project cost itself. Maintenance costs for the first 5 years of operation may be made a part of the Project cost. SLWM projects can be made financially viable by dovetailing funds from other programmes and sources of funding like MNREGS, MPLAD, MLALAD funds, Finance Commission funds, CSR contribution, Swachh Bharat Kosh, donor funding etc. Funding from programmes of other Ministries and departments may also be converged. 

Sustainable Operation and Maintenance systems have to be put in place before the SLWM projects are taken up. 

The Ministry of Drinking Water and Sanitation shall publish information and manuals including technical information on SLWM on the MDWS website from time to time. [http://www.mdws.gov.in/publications]

Community Sanitary Complex

Community Sanitary Complexes comprising an appropriate number of toilet seats, bathing cubicles, washing platforms, Wash basins etc, can be set up in a place in the village acceptable and accessible to all. Ordinarily such Complexes shall be constructed only when there is lack of space in the village for construction of household toilets and the Community/GP owns up the responsibility of their operation and maintenance and gives a specific demand for the same. Such Complexes can be made at Public places, markets, bus stands etc., where large scale congregation of people takes place. 

The maintenance of such Complexes is very essential for which Gram Panchayat should own the ultimate responsibility and the Operation and Maintenance should be assured. User families, in case of complexes specifically meant for households, may be asked to contribute a reasonable monthly user charge for cleaning & maintenance. For complexes in places of community congregation, pay and use model may be encouraged. The proposal for putting up CSC will be approved by the State level Scheme Sanctioning Committee (SLSSC). Suitable Operation and Maintenance and Monitoring guidelines may be issued by the State to ensure proper maintenance of the complex. 

The Ministry has issued a Handbook on Establishment and Management of Community Sanitary Complexes in Rural Areas. The same may be referred for establishing such complexes in rural areas. The book can be downloaded from the website of the Ministryhttp:// www.mdws.gov.in/sites/upload_files/ddws/files/pdfs/CommunitySanitaryComplexes_2Jun2011_PRESS.pdf 

The maximum support per unit prescribed for a Community Sanitary Complex is Rs.2 lakh. Sharing pattern amongst Central Government, State Government and the Community shall be in the ratio of 60:30:10. The Community contribution, however, can be made by the Panchayat out of its own resources, from grants of the Finance Commission, from any other fund of the State duly permitted by it, or from any other source as obtained from the State, District or GP. For, funding the CSCs/public toilets, states may also source additional funds from CSR/CSO/NGO for raising the cost of individual complexes. The mode may be Public Private Partnership (PPP)/VGF which should cater to the need of operation and maintenance of the facilities. Water supply to these CSCs will have to be assured under the NRDWP before a CSC is sanctioned.




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